2nd Convocation of Central University of South Bihar

"21वीं सदी में भारत के समृद्ध बनने की अपार संभावनाएं ! पदमभूषण डॉ० विजय पी० भटकर"

21वीं सदी में भारत एक शक्तिशाली एवं संपन्न देश बन सकता है और इसकी अपार संभावनाएं हैं, और देश के युवा इसको संभव बना सकते हैं ! दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) जैसे विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रगण उच्च शिक्षा तथा शोध से देश को शक्तिशाली बनाने में बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं ! मुझे यह देखकर हर्ष हो रहा है कि 2009 में स्थापित  सीयूएसबी अपनी  स्थापना के 9 वर्षों के छोटे अंतराल में अपने को बिहार की ऐतिहासिक धरती में स्थापित किया है ! इसका श्रेय यहाँ के संस्थापक एवं निर्वर्तमान कुलपति एवं समस्त विवि परिवार को जाता है ! विक्रमशिला, नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों की भूमि बिहार में सीयूएसबी को दोबारा से इस प्रांत की प्राचीन परंपरा और संस्कृति को वापस लाने की अपार संभावनाएं हैं ! ये बातें  नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर (कुलाधिपति) पदमभूषण डॉ० विजय पी० भटकर ने दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के द्वित्य दीक्षांत समारोह में अपने  दीक्षांत अभिभाषण में कहीं !  प्रख्यात वैज्ञानिक और देश के सुप्रसिद्ध परम सुपर कंप्यूटर के जनक  पदमभूषण डॉ० विजय पी० भटकर ने कहा कि भारत सन 1100 तक विश्व का सबसे धनी देश था लेकिन आज़ादी के समय हमारा देश काफी ग़रीब हो गया ! लेकिन आज़ादी से अब तक 70 साल के अंतराल में देश ने विभिन्न छेत्रों में काफी तरक्की की है और स्तिथि ऐसी रही तो भारत विश्व में सबसे शक्तिशाली और समृद्ध  देश बनकर उभर सकता है ! 

अपने अभिभाषण की शुरुवात  पदमभूषण डॉ० विजय पी० भटकर ने सीयूएसबी के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर जनक पांडेय की प्रशंसा करते हुए की और कहा कि उन्होंने विवि को शुरुवाती कठिनाईओं के बावजूद सही दिशा दिखाने का सराहनीय काम किया है ! आगे उन्होंने वर्तमान कुलपति प्रोफेसर हरिश्चंद्र सिंह राठौर के पदभार ग्रहण करने से अब तक के करीब ढ़ाई वर्ष के छोटे अंतराल में विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्ठता और भवननिर्माण के छेत्र में तेज़ी किए कार्यों की सराहना की !  पदमभूषण डॉ० विजय पी० भटकर ने यह आशा जताई कि प्रोफेसर राठौर के नेतृत्व में सीयूएसबी आने वाले समय में काफी विकास करेगा और सफलता के नई ऊंचाइयों को छुएगा ! वहीँ उन्होंने उपस्थित छात्रों को यह सन्देश दिया कि वे मेहनत और लगन से अपनी पढाई पूरी करके देश और दुनिया में अपना तथा भारत का नाम रौशन करें !  पदमभूषण डॉ० विजय पी० भटकर ने यह आशा जताई कि सीयूएसबी जैसे संस्थानों के छात्र तथा युवा देश में बड़ा बदलाव ला सकते हैं ! 

इससे पहले मंगलवार (27 मार्च, 2018) को प्रातः 10:30 बजे बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी) के सभागार में दीक्षांत समरोह की औपचारिक शुरुवात शैक्षणिक शोभा यात्रा से हुई ! इसके पश्चात राष्ट्रगान और विश्वविद्यालय गीत (कुलगीत) गाया गया ! वहीँ दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों परंपरागत भारतीय पहनावे में उपस्थित हुए ! लड़कियों के लिए  ड्रेस कोड सफ़ेद रंग का कुर्ता, सलवार और दुपट्टा है या लाल / मेरून बॉर्डर वाली साड़ी मैचिंग ब्लाउज था ! वहीँ लड़कों के लिए   ड्रेस कोड सफ़ेद कुर्ता तथा अलीगढ़ पाजामा था ! विद्यार्थियों को इसके साथ - साथ पगड़ी और पटका भी पहना हुआ था! पटके के एक पट्टी में विवि का लोगो अंकित था जबकि दूसरे पट्टी में  दीक्षांत समारोह का लोगो बना हुआ था !

इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों में सीयूएसबी के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर जनक पांडेय, प्रति कुलपति प्रोफेसर ओम प्रकाश राय, नालंदा विश्वविद्यालय (राजगीर) की कुलपति प्रोफेसर सुनैना सिंह, महात्मा गाँधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर अरविन्द कुमार अग्रवाल, एनआईटी पटना के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार जैन उपास्थि थे ! वहीँ मंच पर मुख्य अथिति के साथ कुलपति प्रोफेसर राठौर, कुलसचिव डॉ० गायत्री विश्वनाथ पाटिल, परीक्षा नियंत्रक श्रीमती रश्मि त्रिपाठी एवं विभिन्न संकायों के डीन तथा विभागाध्यक्ष उपस्थित थे !

दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए सीयूएसबी कुलपति प्रोफेसर हरिश्चंद्र सिंह राठौर ने भाषण के प्रारम्भ में मुख्य अतिथि  पदमभूषण डॉ० विजय पी० भटकर का स्वागत किया और उन्हें समारोह में शामिल होने के लिए साधुवाद दिया ! अपने भाषण में प्रोफेसर राठौर ने आगे विवि की गतिविधियों और उपलब्धियों को मुख्य अतिथि एवं सभागार में उपस्थित अतिथियों तथा विवि के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों से साझा किया !  उन्होंने बताया कि  आगामी अकादमिक सत्र 2018 - 19 से पूरी तरह से विश्वविद्यालय अपने 300 एकड़ स्थायी कैंपस में शिफ्ट कर जाएगा ! कैंपस की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सीयूएसबी कैंपस विश्वस्तरीय होगा और यह गृहा - 5 मानक पर आधारित ईको - फ्रेंडली ग्रीन कैंपस होगा जो बहुत बड़ी उपलब्धि है ! 

अपने भाषण के बाद कुलाधिपति का दायित्व निभाते हुए कुलपति प्रोफेसर राठौर ने  कार्यक्रम के आगे  चाँसलर स्वर्ण पदक (5) एवं  स्कूल स्वर्ण पदक (25) प्राप्त करने वाले टॉपरों को उपाधि एवं स्वर्ण पदक वितरित किया !  परीक्षा नियंत्रक श्रीमती रश्मि त्रिपाठी ने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले छात्र तथा छात्राओं के नाम बारी - बारी से बुलाकर मंच पर आमंत्रित किया ! सभागार में उपस्थित लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट के बिच सुचेता शर्मा (एमसीसी मैथमेटिक्स), फौज़िया परवीन (एमएससी लाइफ साइंस), प्रेमलता कुमारी (एमएससी बायोटेक्नोलॉजी), पूजा कुमारी (एमएससी कंप्यूटर साइंस) एवं रोहित कुमार (इंटीग्रेटेड बीएससी बीएड) को चांसलर गोल्ड मैडल से सम्मानित किया गया ! वहीँ 25 अन्य छात्र तथा छात्राओं को स्कूल गोल्ड मैडल से कुलपति प्रोफेसर राठौर ने सम्मानित  किया ! इसके पश्चात मुख्य अतिथि ने दीक्षांत अभिभाषण दिया दिया और कुलसचिव श्रीमती गायत्री विश्वनाथ पाटिल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया !  दीक्षांत समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन

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