आज़ादी से आज़ादी की ओरथीम पर सीयूएसबी में पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन

 विवि के  शिक्षक शिक्षा विभाग के नव स्थापित सांस्कृतिक एवं साहित्यिक क्लब ने आज़ादी के 75वें वर्षगांठ के उपलक्ष पर एक ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया। क्लब ने इस अवसर पर पोस्टर प्रदर्शनी और चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जिसमें विद्यार्थियों ने अपने कला को ऑनलाइन माध्यम से साझा किया | इसके साथ - साथ दो लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया | कार्यक्रम की शुरुवात में सांस्कृतिक एवं साहित्यिक क्लब की समनवयक तथा  सहायक प्राध्यापिका डॉ. कविता सिंह ने अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने आजादी को एक सतत चलने वाली प्रक्रिया के रूप में उल्लेख करते हुए कहा की आज़ादी आपके शरीर के अंदर और बाहर दोनों ओर घटित होती है। भीतर घटित होती हुई आज़ादी के मायने हैं सीखे हुए पूर्वाग्रहों, भेदभावपूर्ण अतार्किक दृष्टि, और अन्याय संगत व्यव्हार से आज़ाद होना,जो की लगातर पढने लिखने, बात चीत करने, लोकतान्त्रिक बहसोंवाद-विवादों से अर्जित की जा सकती है डॉ. कविता ने आगे प्रतिभागियों को  सांस्कृतिक एवं साहित्यिक क्लब   के अंतर्गत विद्यार्थी हित में निर्मित चार सोसायटी से भी परिचित कराया

 

 

पोस्टर प्रतियोगिता का थीम था आज़ादी से आज़ादी की ओर’ जिसमें प्रतिभागियों ने पोस्टर निर्माण के पीछे के विचार को भी साझा किया। पोस्टर के माध्यम से उन्होंने बताया कि सन 1947 की आज़ादी बस एक आगाज़ थी उस आजादी के बावजूद एक बड़ी जनसँख्या भूख, गरीबी, अशिक्षा, अन्यायअत्याचार से आज़ादी नहीं पा सकी है, इसलिए पूर्ण आज़ादी का आना अभी बाकी है। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के विजेता रिंकी कुमारी, सौम्यां रैना और यागफिर मुन्ताहा रहे। वहीँ चित्र प्रदर्शनी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने नारी सशक्तिकरणबाल मजदूरी से आजादी,  मुक्त शिक्षा,  आजाद प्रेस और नव ऊंचाई को छूता भारत जैसे विषयों को फोटो के द्वारा प्रस्तुत किया। फोटो प्रदर्शनी प्रतियोगिता का थीम था आज़ादी जैसा की मै देखती/देखता हूँ। इसके विजेता रहे श्रुति सुहानी, रिंकी कुमारी एवं अभिषेक कुमार। प्रतियोगिता की प्रविष्टियों के निर्णायक मंडली में भाषा केंद्र के सहायक प्राध्यापक डॉ. योगेश प्रताप शेखर और डॉ. अर्पणा झा शामिल थे।

 

सत्र के अगले चरण में दर्पण फिल्म एंड थिएटर सोसायटी के विद्यार्थियों ने दो लघु फिल्म प्रदर्शित की। यह फिल्में 1947 पूर्व बनी सिनेमा का स्वतंत्रता आंदोलन पर प्रभाव’ और राष्ट्रीय संकेतों का जश्न’ विषयों पर आधारित थीं ।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में शिक्षक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कौशल किशोर और प्रोरेखा अग्रवाल ने कोविड-19 के बावजूद विद्यार्थियों की रचनात्मकता इनपुट और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरी टीम की  प्रशंसा की। विभाग के प्राध्यापक डॉ. समरेश भारती ने सफल कार्यक्रम के लिए उपस्थित श्रोताओं का अभिवादन किया।

विभाग के प्राध्यापक गण डॉ. मितांजली साहूडॉ. रिंकीडा. स्वाति गुप्ताडॉतरुण कुमार त्यागीडॉ. चंदन श्रीवास्तवडॉ. मनीष कुमार गौतम एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया। डॉ. कविता सिंह के निर्देशन में शिक्षार्थी धीरज कुमार गुप्ता, अनुराधा प्रिया कुमारी, रिशु कुमारी चौबे, सैयद अफजलअमन कुमारप्रथम राजआदर्श प्रियदर्शी और उनकी पूरी टीम की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रही। 

 

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