सीयूएसबी में हिंदी दिवस एवं हिंदी पखवाड़ा का आयोजन 

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देषों के अनुरूप प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में दिनांक 14 सितम्बर, 2021 को हिन्दी दिवस के आयोजन के साथ - साथ हिन्दी पखवाड़े का उद्घाटन किया गया। विश्वविद्यालय में हिन्दी पखवाड़ा का आयोजन दिनांक 14 सितम्बर, 2021 से 28 सितम्बर, 2021 के दौरान किया जा रहा है। पखवाड़े के अन्तर्गत विविध कार्यक्रम यथा- परिचर्चा, विषय- राजभाषा को व्यावहारिक आयाम देने हेतु विद्यमान चुनौतियां, स्लोगन प्रतियोगिता, परिचर्चा, विषय - नयी शिक्षा नीति: भारतीय भाषा नीति, भाषण प्रतियोगिता, विषय - स्वतंत्रता के 75 वर्ष: उपलब्धियां व चुनौतियां, स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिता एवं टिप्पण तथा प्रारूपण प्रतियोगिता का आयोजन किया जाना है। पखवाड़े का औपचारिक समापन विजेताओं को पुरस्कृत करने के साथ दिनांक 28 सितम्बर, 2021 को किया जायेगा।


आज दिनांक 14 सितम्बर, 2021 को प्रशासनिक भवन के सम्मेलन कक्ष में माननीय कुलपति प्रो० कामेश्वर नाथ सिंह की गरिमामयी उपस्थिति एवं अध्यक्षता में आयोजित की गयी। सर्वप्रथम उपकुलसचिव-सह-राजभाषा प्रकोष्ठ प्रभारी श्री प्रतीश कुमार दास ने इस अवसर पर गृहमंत्री, भारत सरकार एवं शिक्षा मंत्री, भारत सरकार द्वारा हिन्दी दिवस के अवसर पर प्रेषित शुभकामना संदेश का वाचन किया और तदोपरांत संघ की राजभाषा नीति, राजभाषा अधिनियम 1963, राजभाषा नियम 1976 एवं राजभाषा संकल्प 1968 की मुख्य बातों को साझा करते हुए हिन्दी पखवाड़े के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस अवसर पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो० आतिश पराशर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हिन्दी का प्रयोग महज औपचारिकता न हो बल्कि हम कार्यालयी कार्यों में सहज रूप में इसका दिनानुदिन प्रयोग करें। कुलानुशासक प्रो० उमेश सिंह ने अपने भाषण में यह कहा कि हिंदी प्रयोग करनेवाले कभी भी अपने आपको हीन भावना से ग्रस्त या द्वितीयक नागरिक ना समझें बल्कि गर्व महसूस करें। भारतीय भाषा पीठ के अधिष्ठाता प्रो० सुरेश चन्द्र ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हिन्दी का विकास एवं हिन्दी का महत्व स्थापित करना हम सबकी जिम्मेदारी है, इसका विकास कोई विदेशी या बाह्य व्यक्ति नहीं सोच सकता।

 
माननीय कुलपति  प्रो० कामेश्वर नाथ सिंह ने अपने उदबोधन में सर्वप्रथम सभी को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं दी एवं हिन्दी पखवाड़े के व्यापक आयोजन को सराहा। उन्होंने कहा कि मातृभूमि और मातृभाषा की अभिव्यक्ति का भाव एक सहज प्रक्रिया है और जब हम भाववश हिन्दी का प्रयोग करेंगे तो भाषा भी समृद्ध होगी। उन्होंने कहा कि हिन्दी बहुत सरल और सहज भाषा है और इसके प्रयोग में हमें कोई संकोच नहीं करना चाहिए। शुरुआत में  वर्तनी एवं त्रुटि हो सकती है पर प्रयोग से यह अपने आप सुधर सकते हैं पर प्रयोग में संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी संकायगण, अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण को कहा कि आज हम यह संकल्प लें कि हम कार्यालय के सामान्य सभी कार्य यथा- टिप्पण, प्रारूपण, पत्राचार, बैठकों में प्रयोग की जानेवाली भाषा आदि में हिन्दी का ही प्रयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि संकल्प तभी लिया जा सकता है जब यह विकल्प रहित हो। अतः हम यह सोच लें कि हिन्दी का प्रयोग ही एक मात्र विकल्प है। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 में भी भारतीय भाषाओं की अप्रतिम भूमिका के बारे में भी बताया। कार्यक्रम के दौरान परीक्षा नियंत्रक श्रीमती रश्मि त्रिपाठी, पुस्तकालयाध्यक्ष डा० प्रमोद कुमार सिंह, स्कूल ऑफ फिजिकल एवं केमिकल साईंसे के डीन प्रो० वेंकटेश सिंह, शिक्षा पीठ के अधिष्ठाता प्रो० कौशल किशोर एवं अन्य संकायगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण के साथ बड़ी संख्या में ऑनलाइन माध्यम से भी श्रोतागण जुड़े। 

 

 

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