"प्राचीन भारतीय ग्रंथों का करें गहन अध्ययन", कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह

आज के वैश्विक परिदृश्य में भारतीय साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए  प्राचीन भारतीय ग्रन्थों का गहन अध्ययन अति आवश्यक है और इस दिशा में सार्थक प्रयास करने और उचित क़दम उठाने आवश्यकता है | ये सोच-विचार का विषय है कि पश्चिमी साहित्य जहाँ अपना वर्चस्व बना चुके हैं ऐसे में हम अपने युवाओं को कैसे भारत की मूल साहित्य से रूबरू करवाएं ताकि हमारी प्राचीन विरासत को वापस हासिल किया जा सके | भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति पर अपने विचार प्रकट करते हुए ये महत्वपूर्ण बातें दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के माननीय कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह ने कहीं | माननीय कुलपति ने राष्ट्रीय गणित दिवस के उपलक्ष में विवि के विवेकानंद व्याख्यान शंकुल में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में अपने अध्यक्षीय भाषण में महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जीवन से जुड़े  पहलुओं को भी साझा किया | उन्होंने कहा कि विवि के केन्द्रीय पुस्तकालय में प्राचीन भारतीय ग्रन्थों से युक्त ग्रन्थालय को स्थापित किया जाएगा जिससे विद्यार्थियों एवं पाठकों को भारत के गौरव पूर्ण इतिहास को जानने और समझने का मौका मिलेगा । उन्होंने भारत से बाहर जाकर शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को अपनी संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।  

 

सीयूएसबी के गणित विभाग एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन माननीय कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह ने संस्कृति उत्थान न्यासनई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी एवं बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के सदस्य प्रो० विजय कान्त दास के साथ साथ दीप प्रज्वलित करके किया  इस अवसर पर कार्यक्रम के समन्वयक और गणित विभागाध्यक्ष प्रो० हरे कृष्ण निगमछात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो० आतिश पराशरकुलानुशासक प्रो० उमेश कुमार सिंहपरीक्षा नियंत्रक श्रीमती रश्मि त्रिपाठी आदि मौजूद थे इसके पश्चात्  गणित विभाग के सांस्कृतिक समिति द्वारा सरस्वती वन्दना एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किया गया 

 कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री अतुल कोठारी ने अपने उद्बोधन में श्रीनिवास रामानुजन की असाधारण उपलब्धियोंउनके सरल जीवन एवं विद्वता के बारे में बताया ।  श्रीनिवास रामानुजन के जीवन से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने साधना से सिद्धि प्राप्ति के महत्व को भी विस्तार से बताया ।  श्री अतुल कोठारी ने   रामानुजन के शोध कार्यों की चर्चा करते हुए उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को रामानुजन से जुडे़ गणित विषय पर शोध आदि के लिए भी प्रेरित किया । उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में नई शिक्षा नीति की उपयोगिता एवं महत्व के बारे  में भी बताया ।

 वहीँ अन्य अतिथि वक्ता प्रो० विजय कान्त दास जी ने शिक्षा और संस्कृति के जुड़ाव के महत्व को बताया ।  कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यक्रम के समन्वयक  प्रो० हरे कृष्ण निगम ने स्वागत भाषण एवं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माननीय श्री अतुल कोठारी जी का संक्षिप्त जीवन परिचय प्रस्तुत किया । प्रो० हरे कृष्ण निगम ने श्रीनिवास रामानुजन की गणित के क्षेत्र में विशेष उपलब्धियों एवं उनके असाधारण शैक्षणिक  व्यक्तित्व से सबको अवगत कराया ।

 

 कार्यक्रम का मंच संचालन गणित विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ० विवेक कुमार जैन ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन विभाग के ही सहायक प्राध्यापक डॉ० पंकज मिश्रा ने प्रस्तुत किया 

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