Foundation Day Lecture - School of Education, स्थापना दिवस व्याख्यान, शिक्षा संकाय
स्थापना दिवस व्याख्यान, शिक्षा संकाय
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB), गया के शिक्षा संकाय द्वारा 10 फरवरी 2026 को मालवीय भवन के सेमिनार हॉल में “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शैक्षणिक ईमानदारी: हमारे राष्ट्र की आवश्यकता” विषय पर स्थापना दिवस व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों के आगमन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रो. रवि कांत, डीन, शिक्षा संकाय एवं अध्यक्ष, शिक्षक शिक्षा विभाग, CUSB ने स्वागत भाषण दिया और अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने व्याख्यान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वसनीय शोध परंपरा के लिए शैक्षणिक ईमानदारी को एक मूल आधार स्तंभ के रूप में सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. तरुण कुमार त्यागी, सहायक प्राध्यापक, शिक्षक शिक्षा विभाग एवं निदेशक, MMTC योजना ने मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) हरिकेश सिंह, पूर्व कुलपति, जे.पी. विश्वविद्यालय, छपरा का औपचारिक परिचय कराया।

अपने मुख्य व्याख्यान में प्रो. (डॉ.) हरिकेश सिंह ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की प्राप्ति में शैक्षणिक ईमानदारी की केंद्रीय भूमिका पर गहन और विचारोत्तेजक वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण, अधिगम और शोध में ईमानदारी केवल नियामक आवश्यकता नहीं बल्कि एक विश्वसनीय शैक्षणिक व्यवस्था की नैतिक और बौद्धिक नींव है। उच्च शिक्षा के समकालीन परिदृश्य, विशेषकर डिजिटल संसाधनों और AI-सहायित शोध के दौर की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने शोधार्थियों को मौलिकता, नैतिक उत्तरदायित्व, उचित संदर्भण और बौद्धिक सत्यनिष्ठा अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने शोध गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दस प्रमुख मानकों का एक संरचित ढांचा प्रस्तुत किया, जिसमें कठोरता, पारदर्शिता, पुनरुत्पादकता और सामाजिक प्रासंगिकता शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय का वास्तविक दायित्व शिक्षण, शोध और विस्तार के समन्वित स्तंभों पर आधारित है। उनके व्याख्यान के पश्चात विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ एक सक्रिय संवाद सत्र भी आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने स्थापना दिवस के व्यापक संस्थागत और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर सामूहिक आत्मचिंतन, शैक्षणिक प्रतिबद्धता के नवीकरण और संस्थागत मूल्यों की पुनर्पुष्टि के क्षण होते हैं। बिहार की समृद्ध बौद्धिक विरासत और नालंदा जैसे प्राचीन वैश्विक ज्ञान केंद्र की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे उत्कृष्टता, नैतिकता और नवाचार को आगे बढ़ाएं। उन्होंने बल दिया कि शैक्षणिक ईमानदारी को केवल औपचारिक प्रक्रिया न मानकर संस्थागत संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय मूल्य-आधारित और भविष्य उन्मुख शिक्षा के माध्यम से शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है और भारत की ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने अंत में शिक्षकों और विद्यार्थियों से मिलकर पारदर्शी, उत्तरदायी और उच्च गुणवत्ता वाली शैक्षणिक व्यवस्था के निर्माण का आह्वान किया।
धन्यवाद ज्ञापन प्रो. आशीष कुमार सिंह, शारीरिक शिक्षा विभाग, शिक्षा संकाय, CUSB द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित संकाय सदस्यों में डॉ. रिंकी, डॉ. चंद्र प्रभा पांडेय, डॉ. प्रज्ञा गुप्ता, डॉ. किशोर कुमार, डॉ. मोजम्मिल हसन, डॉ. समरेश भारती, डॉ. मितांजली साहू, डॉ. स्वाति गुप्ता, डॉ. गौरव तथा डॉ. नरेन्द्र वीर सिंह शामिल थे। कार्यक्रम का सफल संचालन दिव्य प्रकाश, शोधार्थी, शिक्षक शिक्षा विभाग द्वारा किया गया। यह व्याख्यान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्रीय विकास के लिए शैक्षणिक ईमानदारी, शोध उत्कृष्टता और नैतिक विद्वत्ता को बढ़ावा देने के विश्वविद्यालय के संकल्प को पुनः स्थापित करता है।



